संघर्ष में ही ख़ुशियाँ ढूँढे गीत

ज़रूरी नहीं जग में सभी सुखी ही होई,लिखा जो ललाट पे, मेट सके न कोई॥विधि की गति विधि ही जाने, जान सका न कोई,सुख है तो दुख भी होता,बचा न जग में कोई॥देव, दनुज, किन्नर सब देखे सब दुखी ही दिखते हैं,ईश्वर भी तो पीड़ित दिखता वन-वन सिया राम भटकते सोई॥मत घबराओ, दुखी न होओ,दुनिया … Read more

गीत जब मैं नहीं रहता सूफी भक्ति शैली

जब मैं नहीं रहता, तू दिखता रे,जब मन मौन हो, तू झलकता रे।ना रूप तेरा, ना कोई साया, फिर भी हर सांस में तू धड़के रे॥ढूँढा तुझको जग के कोनों मेंमंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में, पर पाया जब भीतर झाँका,तू ही था मेरी धड़कनों में।कण-कण में तेरी आभा छाई,हर कण बोले “तू ही तू” कहके रे॥जब … Read more

मत फेंक नन्ही जान को

मत फेंक नन्हीं जान को, ये तो प्रभु का वरदान है,मां की आँचल में बसता, सारा संसार महान है॥ठंडी सड़क किनारे रोती, नन्हीं-सी वो जानकाँप रही थी मासूम काया, ना था कोई सामान, ओढ़नी भी न दी किसी ने, बस चुप था सारा जहाँ,क्या पत्थर बन गया इंसान, क्या खो गया ईमान?कूड़े के ढेर में … Read more

माँ सरस्वती वंदना

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए,नित आपका गुणगान करे।शब्द बने सब गीत सुहाने,आपका ही बखान करे॥मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥वीणा की झंकार में माँ,ज्ञान सुधा तू बरसाए।मूक वाणी को दे स्वर माँ,हर मन मंदिर सजाए॥मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥अज्ञान का तम दूर हो माँ,तेरी कृपा हमें मिल जाए।प्रेम-भक्ति से भर दे हृदय,हर जन प्रभु को पाए॥मेरी … Read more

छठ पूजा

उषा की अरुणिमा छा गई, घाटों पर भक्ति का रंग,सूर्य को अर्घ्य दे रहीं, माताएँ मन में उमंग।संयम, श्रद्धा, सेवा से, होता यह पर्व महान,छठी मइया का वरद हाथ, सब पर रखे पहचान।जल में खड़ी अधरों पे भजन, नेत्रों में आस्था की रेख,काँच की चूड़ियाँ झनक उठीं, जब गाया सूर्य का लेख।प्रकृति भी झूमी साथ … Read more

जब भक्ति लेखनी बन जाये

जब भक्ति लेखनी बन जाए प्रभु का नाम ही ध्यान में आए, शब्द बने सब गीत सुहाने मन-मंदिर में दीप जलाए॥ना यश की, ना धन वैभव की चाह बस चरणों में मिले ठिकाने, तेरे नाम का अमृत पीता रहूँ तेरी भक्ति में दिन बिताने॥हर अक्षर में तेरा निवास प्रभु, हर पंक्ति तेरी महिमा गाए।भाव-भाव में … Read more

मौन भी अधर्म का साथ है

श्रीकृष्ण वाणी मौन भी अधर्म का साथ हैमौन भी अधर्म है यदि आप मौन हैं!हे अग्रज भ्राता बलराम!आज आप अपने प्रिय शिष्य दुर्योधन के जाँघ पर वार करने पर प्रश्न उठा रहे हैंकिस नीति की बात कर रहे आप?कहाँ थे आप उस समय जब भीम को विष दिया गया था?तब आप मौन रहे।जब लाक्षागृह में … Read more

जीव और ईश्वर

ईश्वर परम चेतना सागर, अनंत प्रकाश अपार,जिससे सृष्टि सजीव हुई, जग में फैला प्यार।जीव उसी का अंश है, चेतन उसका रूप,पर सीमित उसकी दृष्टि है, जीवन का बस रूप।ईश्वर सबमें व्याप्त हैं, साक्षी सब घटनाक्रम के,जीव बँधा शरीर में, बंधन उसके कर्म के।दो प्रकृतियाँ वर्णित हुईं, एक अचेतन स्थूल,दूसरी चेतन जीव है, यह गीता का … Read more

एक और क्रांति बाकी है

कहने को आज़ाद हैं हम पर बंधन अब भी बाकी हैं,हर ओर चमकता स्वार्थ यहाँ एक और क्रांति बाकी हैनेता बदल गए वेश यहाँ पर सोच वही पुरानी है,जनसेवा के नाम तले बस सत्ता की कहानी है।विकास के वादे मंचों पर बस शब्दों में जगमगाते हैं,पर गाँव की टूटी गलियों में बच्चे अब भी भटक … Read more

भाव गीत कोयलिया

कोयलिया! तू कितनी प्यारी,तेरी बोली मधुर सुहानी,तेरे सुर में जादू बसता, हर डाली पे तेरा गाना! रंग तेरा भले काला हो, बोली तेरी मतवाली हैतेरी तान सुनकर कोयलिया,प्रकृति भी मुस्कराती हैपर जब तेरी कथा सुनी मैं, मन भीतर कुछ टूटा है,तू अपने अंडे नहीं सेती, कौओं के घर छोड़ा है। कहाँ गया तेरा मातृत्व,कहाँ तेरी … Read more