राधे राधे भजन

जपे जा राधे राधे दौड़े आयेंगे कान्हा .वह ग्वालिन बरसाने वाली उसका नाम है राधा, वह तो है वृषभान दुलारी उसके पीछे भागे कान्हा ।राधा रानी मोहिनी तो मोहन हैं कान्हा राधा रानी चूड़ी तो कंगन हैं कान्हा ।राधा रानी मुरली तो तान है कान्हा राधा रानी सागर तो तरंग है कान्हा । राधा रानी … Read more

दिया जलाये

मित्रों एक ऐसा दिया जलायें हृदय स्थल तक प्रकाश करे मन का कलुषित भेद मिटा दे जड़ से इसका विनाश करें ।क्या तेरा है और क्या मेरा है यह सब मन का ही फेरा हैजब तक है प्राण इस तन में साथ बैठकर हम श्वास भरे ।एक दिया इतना सुन्दर हो जैसे होता देवों का … Read more

हाइकू

तू मित्र मेरा मेरा हृदय मीततू कहाँ चला ।तू छोड़ चला इस दुनिया को हीन पता चला । तप्त हृदय अश्रुपूर्ण नयन किससे कहूँ । नश्वर जग कोई न कालजयी जीवन सत्य ।मृत्यु अटलपल का भी न पता अन्तिम सत्य । स्वरचित –

लेखन एक कला है

लेखन एक कला है लिखते तो सभी हैंलिखावट है न एक जैसी इसकी नही नक़ल है ।अभ्यास कर रहा हूँ लेखनी को धार दे रहा हूँ हाय कुंठित है बुद्धि मेरी विचारों की जो कमी है । मैं हूँ कोरा काग़ज़ शब्द नहीं मिल रहे हैंलेखनी है आज कुंठित भावों की जो कमी है ।वह … Read more

प्रभु तेरे चरणों में भजन

प्रभु तेरे चरणों में मन मेरा लागाहर क्षण हर पल उमगत अनुरागा ॥जिन चरणों के चरण रज पाकरगौतम पत्नी अहिल्या तरी थी पायी मुक्ति पति घोर शाप से उन पद पंकज में मन मेरा लागा ॥जहां राम मेरे धरती पर थे सोये कुश पल्लव का बिछौना बिछाये सिरहाने की तकिया हाथों की बनाये उस धरा … Read more

चार गपोले

चार गपोले बैठे थे आपस में खूब छान रहे, फेंक रहे ऊँची ऊँची शेखी अपनी बघारते हैं ।करते चर्चा बच्चों कीनाते रिश्तेदारों कीमहिमा मंडन करते हैं शान उसी में समझते हैं ।एक बोला मैंने बोया चौदह बीघे पुदीना दूसरा कहता बीस ट्रक चलवाते हैं । तीसरा बोला हमें भी सुन लो हम किसी से कम … Read more

कहाँ मैं ढूँढू कहाँ मैं पांऊ भजन

खोजूँ कहाँ मैं पाऊँ कहाँ पर नहीं पता मैं जाऊँ कहाँ परकोई कहे मथुरा कोई कहे काशी कोई कहे प्रभु मेरे हैं अविनाशी ।कोई ढूँढता है प्रकृति में कोई संगीत में पाता हैकोई ढूँढता मन मन्दिर में प्रभु दर्शन के सब अभिलाषी । प्रभु तो है सर्वत्र समाना वेद पुराण कहे यही जानाप्रभु तो हैं … Read more

ऐ ज़िंदगी

ऐ मेरी ज़िंदगी !! क्या लिखूँ तुझ पर तू तो एक किताब हैपढ़ सका है न कोई तेरा न कोई हिसाब है ।कभी रुलाती कभी हंसाती क्या क्या तू नही करती है चलती फिरती ज़िन्दगी को दांव पर लगा तू देती है एक डगर पर कभी न चलतीडगर बदलती रहती है आड़े तिरछे पग तेरे … Read more

एक माँ की वेदना

चुप हो जा मेरे लाल मत रो मेरे लाल रो रो के हो गया बेहाल चुप हो जा मेरे लाल तू तो है अभी अबोध तुझे कुछ भी नही प्रबोध तू हो गया अनाथ कौन देगा तेरा साथ ? गोद में खिलाते थे तेरे पापा तुझको कंधे पर बिठाते थे तुझको बुनते थे हम दोनों … Read more

उठाया गोवर्धन चक्रधारी ने

उठाया गोवर्धन चक्रधारी ने अपनी एक ऊँगली के बल पर,पर चुना क्यों कनिष्ठा को उसकी सुन्दर कथा सुनाता हूँ ।कान्हा ने पूँछा ऊँगलियों से किस ऊँगली का प्रयोग करूं, सब रखो पक्ष अपना अपना निर्णय स्वयं तब मैं करता हूँ ।अंगूठा बोला सबसे पहले प्रभु मैं एक नर बलशाली हूँ, बाक़ी तो हैं केवल अबलायें … Read more