Umanath Tripathi
मां बाप का दर्द
इतना न इतराओ बच्चों ये माँ बाप तुम्हारी पूँजी हैं भीख नहीं ये मांग रहे प्यार में तुम्हारे झुकते हैं । तुम्हारी दया के पात्र नहीं साक्षात देव तुल्य हैं ये चाहे जितना दुत्कार मिलेआशीर्वाद हृदय से देते हैं ।हर चुनौतियों से लड़ते हुए तुमको पाला पोसा है सहारे की लाठी बन जाओ तुम्हारा सहारा … Read more
मिट्टी का घड़ा
मिट्टी का घड़ा ✍️किसी ने पूँछा घड़े से तुम इतना शीतल क्यों हो? घड़ा बोला -शीतलता मेरा गहना है कोमलता है मेरा स्वभाव विशुद्ध निर्मल मन है मेरा जीवन केवल परोपकार..पैदा हुआ मैं मिट्टी से अतीत है मेरा मिट्टी का किस बात का अहम् करूं जिस पर मैं इतराऊँ कृतघ्न नही कृतज्ञ हूँ मैं अपने … Read more
कैसे कहूं मैं कवि हूँ
कैसे कहूँ मैं कवि हूँ पूरी वर्णमाला तक तो याद नहीं व्याकरण का पता नहीं अपना लिखा भी भूल जाता हूँ ठोक पीटकर जो गढ़ते हैंउनमें से मैं हूँ नहीं, कैसे कहूँ मैं कवि हूँ ।अन्तर्मन के मेरे शब्द मेरे बच्चों की तरह हैंजो समय पाकर बढ़ते रहते हैं नाराज़ होकर अपना अलग घर बना … Read more
एक कवि की वेदना
सोच रहा हूँ अगर गया तो क्या छोड़ूँगा अपने पीछे कुछ लिखी कवितायें जिसका कोई मोल न होगा इस तंग दिल दुनिया मेंदो एक दोस्त जिस परभरोसा है कुछ बना हुआवह भी कितना साथ निभायेंगे कुछ पता नहीं भागम भाग रहा जीवन हिसाब किताब की बही में ऐसा कुछ भी नहीं जो प्रिये तुम्हारी मुसीबतों … Read more
कान्हा मुक्तक
कान्हा कान्हा मन पुकारे, कान्हा में मन रमता हैकान्हा की मोहिनी सूरत पर, दिल मेरा जा टिकता है ठुमक ठुमक कर कान्हा भागे, माँ यशोदा पीछे धायेनंदबाबा टुकुर-टुकुर निहारे, ठुमकना अच्छा लगता है ।कान्हा की लीला है न्यारी, व्याकुल दौड़ती गोपियाँ सारीकान्हा मुरली की तान सुनावें,मंत्रमुग्ध हुई है प्रकृति सारी कान्हा वन में गाय चराते, … Read more
मैं अब बदलने लगा हूँ
दोस्तों !मैं अब स्वयं को बदलने लगा हूँ अपने में ही अब मैं जीने लगा हूँ नही पालता कोई टेंशन की बातेंअपने में ही मैं मुस्कुराने लगा हूँ ।लेखनी से भी दोस्ती करने लगा हूँमन में जो आये वो लिखने लगा हूँ नही पड़ता बेमतलब के पचड़ों में सेवानिवृत्ति का लुत्फ़ लेने लगा हूँ ।बेबसी … Read more
राधे कृष्ण भजन
आओ श्याम न करो देर श्री राधे बाट निहार रही,महा रास की बेला आ पहुँची सखियों संग बाट निहार रही ।चंदा सी शीतल चाँदनी में सखियों संग राधे विराज रही,फूलों से बगिया महक रही यमुना भी लहरें मार रही । कोई कुंज निकुंज संवार रही कोई राधा जी को निहार रही, कोई हाथ में मेंहदी … Read more