आओ जश्न मनाये आज़ादी

हे ! मातृभूमि तुझे प्रणाम.२

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

आओ जश्न मनाएँ गणतंत्र दिवस

आओ जश्न मनाएँ आज़ादी,

पर पल भर ठहर कर सोचें हम,

कैसे पायी यह आज़ादी

हाँ कैसे पायी ये आज़ादी ??

राष्ट होता सर्वोपरि,

एक जूनून था, एक आंदोलन था,

जय हिंद जयहिंद का नारा था,

आओ पहले नमन करें

हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को,

आओ पहले नमन करें,

हम अपने वीर शहीदों को,

जिनके बल पर हम आजाद हुए

जश्न मना रहे आज हम आज़ादी

वंदे मातरम्वंदे मातरम्॥

बहुतों न प्राण गँवाया है,

बहुतों ने परिवार को त्यागा है,

पर नहीं डिगे आज़ादी के प्रण से

हँसते हँसते शूली पर लटक गये

जय हिंद का नारा लगाते थे,

आगे बढ़ते जाते थे,

गोली पर गोली खाते थे,

पर सीना ताने रखते थे

खून से होली खेलते थे

प्राणों का मोह न पाला था

केवल आज़ादी का नारा था,

हमें चाहिये आज़ादी

यूँ ही नहीं पायी हमने आज़ादी

वंदे मातरम्वंदे मातरम् ॥

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,

सब एक सूत्र में बंधे हुए थे,

जाति पाँति का न भेदभाव था

एक पंक्ति में खड़े हुए थे ।

बापू अहिंसा के पक्षधर थे

कहते थे अंग्रेज़ों - हमें गोली मारो

कितना भी तुम अत्याचार करोगे ?

हम नहीं डरेंगे, नहीं झुकेंगे,

आज़ादी लेकर हम रहेंगे,

हमें चाहिए केवल आज़ादी ॥

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

नेता सुभाष चन्द्र बोस ने हुंकार भरी

नहीं नहीं !! ये देश हमारा है,

हम नहीं रुकेंगे, नहीं झुकेंगे

दुश्मन को सबक सिखाएँगे

बोले हे मेरे देश के वीरों !

“ तुम खून दो हम आजादी देंगे “।

तानें पिस्टल कनपटी पर,,

वो सीन मुझे याद आता है,

अंग्रेजों तुम नही पकड़ पाओगे,

ये चन्द्र शेखर आजाद है, ,,,,,

आज़ाद है आजाद है ..

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई,

तात्या टोपे, भगत सिंह,

लाला लाजपतराय, गंगा धर तिलक,

खुदी राम बोस जैसे

महान क्रांतिकारी सेनानियों का

त्याग और बलिदान मुझे आता है,,

मित्रों यूँ ही नहीं पायी हमने आज़ादी

पथ अपना अपना सबको प्यारा था

सब आज़ादी के दीवाने थे,

केवल एक ही नारा था, हमें चाहिए आज़ादी ॥

यह भारत देश हमारा है,

हमको प्राणों से प्यारा है

हमें चाहिए केवल

आज़ादी ! आज़ादी ! आज़ादी !

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

जहाँ भी आज हम खड़े हुए हैं

बहुत क़ुर्बानियाँ हमने दी है

ये राष्ट्र ध्वज अब नहीं झुकेगा

भारत विश्व गुरू बन कर रहेगा ।

हाँ, एक पीड़ा मन में उठती है

जयचंदों से डर लगता है,

जो इस देश की मिट्टी की रोटी खाकर

देश की निंदा करते हैं।

हमें सजग रहना होगा,

देश की अस्मिता बचानी होगी।

अक्षुण्ण रहेगा जब भारतवर्ष,

तभी सच्चे अर्थों में

मनाएँगे जश्न-ए-आज़ादी।

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

आओ जश्न मनाये गणतंत्र दिवस

हम तो आज आजाद हैं

पर क्यों न हम अपने इतिहास में झाँकें

कैसे पायी थी ये आज़ादी !

वंदे मातरम्वंदे मातरम्

जय हिन्द जय भारत 🇮🇳

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