भजन राम आयेंगे

भजन : “राम आयेंगे राम आयेंगे

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे,

धरती पर जब-जब अधर्म बढ़ेगा, राम आयेंगे।।

जब-जब संकट छाया जग पर, प्रभु ने रूप सँवारा है,

हर युग में रघुवर ने आकर, धर्म का दीप उजारा है।

सत्य यही हैसृष्टि बदले पर, राम सदा ही आयेंगे

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।

परमधाम का क्षण जब आया, राम ने सहज स्वीकार किया,

अंगूठी गिरा फर्श के नीचे, हनुमत का सम्मान किया।

पाताल गए जो खोजन को, प्रभु की लीला जान गये

राम अमर हैं, युग बदले लेकिन, राम सदा फिर आयेंगे

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।

नाग लोक में अंगूठियों का, पर्वत दृग को चमक गया,

हर कल्प में आते रघुवर, सत्य वहाँ पर दीख गया।

हनुमत बोला“प्रभु तुम बिन, मन कैसे दिन बितलाये?”

राम हँस बोले“मत रो वत्स, हम फिर से जन्म में आयेंगे”

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।

कहते“वत्स! रहो तुम धरती पर, अप्रत्यक्ष मेरा रूप बने,

भक्तों के दुख हरते रहना, राम-नाम का दीप जले।”

“जपते रहना मेरा चरण, बस प्रेम का सृजन फैलाना,

वचन हमारासमय बदलता है, पर हम फिर लौट के आयेंगे”

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।

राम-नाम की सुरभि पाकर, जीवन पुलकित हो जायेगा,

हर पीड़ा हनुमत हर देंगे, हर घाट अँधेरा छँट जायेगा।

बंधु! बस तुम प्रेम जगाओ, पथ पर दीपक जलवाओ,

राम पुकार सुनकर ही जग में, फिर अवतार धरे आयेंगे

राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।

Leave a Comment