यही मेरी असलियत✍️
ये नाम,ये पद, ये शोहरत क्या है और क्या करे इसका ? सब शून्य ही तो है, केवल लोक व्यवहार के लिए है। मत उलझो मिथ्या भ्रम में, इसी में चक्कर लगाते रहोगे, कुछ हाथ में नहीं रहेगा ।
न मैं लेखक हूँ, न मैं गायक हूँ न शिक्षक हूँ न हूँ पत्रकार
न विद्वान न विचारक, न साधक, हाँ हूँ तो केवल एक मात्र पथिक । मानव शरीर में संसार में आया हुआ, एक यात्री हूँ जो निरंतर चलायमान है। पिता, भाई, पितामह नाना, भाई, मित्र, सबकी पहचान खो चुका हूँ ।हर सुबह हमारा है, हर दिन और हर रात मेरे जीने के साक्षी हैं, बताते हैं अभी कुछ कर सकता है तो कर लो ।
न किसी का मित्र हूँ न किसी का शत्रु हूँ केवल एक मात्र-
जगत का कल्याण चाहने वाला, एक मात्र सत्य चेतन आनंद स्वरूप-चिदानंद रूपं शिवोऽहम् शिवोऽहम्।
जहां जाता हूँ वह मेरा घर, जहां रहता हूं वही आशियाना,
उस ईश्वर का साम्राज्य ही मेरा साम्राज्य है ।