वर्षा में प्रकृति और मिलन

वर्षा आई, मेघा छाए, मौसम हुआ ख़ुशनुमा,

पोखर से निकले दादुर जी, सर्पों का सुंदर आहार हुआ।

इक दूजे के बनने आहार, कीड़े-मकोड़े बाहर निकले,

सबने मिलकर खानपान किया, हँसी-खुशी साथ चले

बरसात की बूँदों में नाचे, पत्तों पर संगीत की छाया,

धरती पर हर जीव मिला, समाजवाद का रंग लाया।

कीड़े, मकोड़े, सर्प और दादुर, सबने बाँटी खुशी अपनी,

बरसात की रिमझिम बूँदों में, बसी हँसी और कहानी

धरती हरी, जल-भरपूर, सभी ने मिलकर मनाया,

प्रकृति का यह अद्भुत खेल, सबको साथ साथ लाया।

वर्षा आई, मेघा छाए, मौसम हुआ ख़ुशनुमा,

पोखर से निकले दादुर जी, सर्पों का सुंदर आहार हुआ।

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