वो सूखा पर्वत कहता है
ऐ मेरी प्यारी घाटी !
तू तो मुझसे सुन्दर है
हरियाली से तू है भरी हुई
पर मैं तो एक पौध हेतु तरसता हूँ
हाँ चीड़ का कोई एक आध वृक्ष 🌲
उगाकर मैं भी गर्वित होता हूँ ।
मुझे ये सूखा पन अच्छा नहीं लगता
तुझे देख कर दिल बहलाता हूँ
न कोई मेरे पास आता है
न हाल-चाल मेरा पूंछता है ।
तू तो सबकी प्यारी है
सबके मन को हरती है
आते हैं दूर दूर से सैलानी
झील के तट पर तेरे ठहरते हैं
देखते हैं मुझे, चिढ़ाते हैं मुझे
एक पिक भी मेरी नहीं खींचते
यदि कोई खींचता भी है
तो तुझसे मेरी तुलना करते हैं
चलो यही मानकर मैं खुश रहता हूँ
तेरे साथ सदा मैं रहता हूँ ।
ऐ मेरी प्यारी घाटी !!
मैं तुझे देख कर खुश होता हूँ
तेरी खुशी में खुश रहता हूँ
हरियाली से भरी तू रहे
फूल पत्तों से रहे सुसज्जित !
लोग तुझे देखने आयेंगे
तो मुझको भी देखेंगे
इतना ही मेरे लिए काफी है
तू तो मेरी प्यारी घाटी है ।