सानिध्य प्रभु का जब मिलता है
वरदान स्वरूप यह होता है,
गोवर्धन पर्वत भी प्रभु उठाते हैं
ब्रजवासियों की इन्द्र कोप से रक्षा करते हैं ।
सानिध्य बड़ों का जब मिलता है,
आशीर्वाद स्वरूप यह होता है,
हर कदमों पर सफलता मिलती है,
आकाश की बुलंदियों को छू लेते हैं ।
सानिध्य जीवन में ज़रूरी है,
सुरक्षा कवच का काम यह करता है,
जीवन की हर बाधाओं को
आसानी से पार हम कर लेते हैं ।
सानिध्य बच्चों को जब मिलता है,
माँ बाप की छाया में वे पलते हैं,
अच्छे संस्कार में पोषित हो करके
अपना स्वर्णिम भविष्य वे गढ़ते हैं ।
माँ की सानिध्य की यदि बात करें
देवी स्वरूप वह होती है,
अपने बच्चे के प्राणों की रक्षा में
साक्षात चंडी रूप धारण वह कर लेती है ।
सानिध्य अच्छे गुरू का जब मिलता है,
शिष्य तराशे हीरे जैसे चमकते हैं,
नव निर्माण वे करते हैं
समाज के पथ प्रदर्शक वे होते हैं ।