शब्द ब्रह्म निनाद

शब्दों में ब्रह्म निनाद, जीवन में प्रकाश जगाए रे,

शब्दों में ब्रह्म निनाद, आध्यात्मिक द्वार खोले रे।

शब्द केवल ध्वनि नहीं, ये आत्मा का प्रकाश है,

हर शब्द में छिपा ज्ञान, जीवन का ये साध्य है

शब्द हैं विचार के बीज, मन में उगते बोधिवृक्ष रे

शब्द हैं प्रेम और करुणा, तम का विनाश करे रे ।

मंत्र भी शब्द हैं, शक्ति से परिपूर्ण,

मन को शुद्ध करते, तपस्वी पाते विशुद्ध रूप

हर उच्चारित शब्द, आत्मा और प्रभु को जोड़ते रे

शब्द हैं राह और मार्गदर्शक, जीवन का सार बताते रे ।

सत्य, प्रेम, सेवा और धैर्य, शब्द हमें सिखाते हैं

शब्दों की साधना से मिटे मन के सारे भ्रम रे

शब्दों के प्रकाश में आत्मा अनुभव करे परमधाम रे

रे मन तू क्यों भटक रहा शब्दों में सुन ब्रह्म निनाद सुने रे ।

शब्दों में ब्रह्म निनाद, जीवन में प्रकाश जगाए रे ।

शब्दों में ब्रह्म निनाद, आध्यात्मिक द्वार खोले रे।

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