ऋतुओं की रानी वसंत

ऋतुओं की रानी

मैं तो वसंत हूँ

फूलों में मैं हूँ

कलियों में मैं हूँ

खेत खलिहानों में मैं हूँ

मैं तो वसंत हूँ ।

इधर घूमती हूँ

उधर घूमती हूँ

बड़ी बावली हूँ

न कुछ फ़िक्र है

न किसी का डर है

मैं तो वसंत हूँ ।

पतझड़ ही मैं हूँ

नव सृजन भी तो मैं हूँ

भौंरों में गूंजती हूँ

कोयल की कुहू कुहू ही मैं हूँ

मोरों का नृत्य भी तो मैं हूँ

मैं तो वसंत हूँ ।

एक सुगंधित हवा हूँ

सर्वत्र फैलती हूँ

मन मोहिनी हूँ

भँवरों में गूंजती हूँ

तितलियों में मंडराती हूँ

मैं तो वसंत हूँ ।

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