प्रेम प्रदर्शित वहीं करे
जो समझे मन के भाव
जलों वहीं जहां पडे ज़रूरत
उजालो में दीपक का नही ठांव ।
हक़ीकत की भीड़ में
गुमशुदा सपने ढूँढ रहे हैं
आजकल हम अपनो में
कुछ अपने ढूँढ रहे हैं ।
चुराना है तो चुराइये शौक से
विचारों की ख़ूबसूरती
सुन्दर चेहरो में क्या रखा है
बदरंग हो जायेगी चलते उम्र ढलती ।
भलाई कभी व्यर्थ नही जाती
नेकी कर दरिया में डाल
लौटेगी कई गुणा लेकर
कर देगी मन को निहाल ।
जीवन है तो परेशानियाँ हैं
सुख दुख जीवन का हिस्सा हैं
जो झेल गया वह जीत गया
जो बैठ गया वह क़िस्सा है ।
ख़ाली हाथ देखकर बर्तन,
न समझे वह भिखारी है
कहीं निकले न वह महा दानी
जो बाँटी अपनी पूँजी सारी है ।
सूत के धागे को मोमबत्ती
हृदय में छिपाये रखती है
पर कातिल तो है वह बेरहम धागा
जो एक दिन मोमबत्ती को जला देती है ।