रिश्ते मुक्तक

रिश्ते आईना होते हैं, सच दिखा जाते हैं,

कभी हँसाते हैं दिल को, कभी रुला जाते हैं।

जो सह ले उनकी खामोशी, जो समझ ले उनका दर्द,

वही लोग रिश्तों को उम्र भर निभा जाते हैं।

हर रिश्ते में शब्द नहीं, भावों की भाषा होती है,

कभी मौन की चोट गहरी, कभी मीठी आशा होती है।

जो पढ़ ले आँखों की लिखावट, बिना कुछ कहे,

समझो उसी के हाथ में रिश्तों की परिभाषा होती है।

रिश्ते बोझ नहीं होते, हम उन्हें बोझ बना लेते हैं,

थोड़ी सी अपेक्षा में, अपनों को पराया कर देते हैं।

यदि छोड़ दें “मैं” और “मेरा” का आग्रह,

तो रिश्ते खुद ही जीवन का सहारा बनते हैं।

रिश्तों में जीत–हार का हिसाब नहीं रखना चाहिए,

हर बात पर तर्कों का जवाब नहीं रखना चाहिए।

जहाँ प्रेम बचा हो थोड़ा भी मन के कोने में,

वहाँ अहंकार का कोई ख़्वाब नहीं रखना चाहिए।

शहद चाहिए तो मधुमक्खियों से प्रीत निभानी होगी,

गुलाब अगर चाहो तो काँटों से भी यारी होगी।

रिश्ते जीवन की पाठशाला हैं, कड़वे बोल सिखाते हैं,

मीठा–कड़वा सब सहकर ही, हर रिश्ते की रखवाली होगी।

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