दर दर भटके, डगर डगर तू ठोकर खाये,
कहीं पर भी न शांति पाये,
मृगतृष्णा में तू कब तक भागे,
ठहर जा ! अब कर ले तू विश्राम । रे मन
प्रभु के श्री चरणों का दर्शन कर ले,
कलुषित मन को तू निर्मल कर ले,
मानव जीवन का कर ले कल्याण,
भज ले रे मन तू सीताराम ! रे मन.
शबरी मैया की तरह भक्ति कर ले,
प्रभु सेवा में तन मन को समर्पित कर दे,
जूंठे बेर भी मेरे प्रभु का भायें,
कर ले भक्ति तू निष्काम । रे मन
ये जीवन है भूल भुलैया,
चार दिनों का है जग फेरा,
मत बना यहाँ अपना स्थायी डेरा,
अंतिम सत्य प्रभु सुख धाम । रे मन.
मेरे प्रभु की लीला है न्यारी,
करते हैं वे जन जन का उद्धार,
देर न कर अब प्रभु के शरण चला जा,
पायेगा तू निश्चित विश्राम । रे मन