राम का दास भजन

रे मन ! हो जा तू राम का दास

हर क्षण हर पल कर अरदास

जो करता प्रभु का भजन है

वही सुशील और पुण्य वान

वहीं साधक वही है ज्ञानी

वहीं तीनों लोकों में है महान ।

रे मन ..

सबके स्वामी, सब में रमते

जाने सबके मन की बात

जिनकी सेवा महादेव है करते

जपते रहते दिन और रात ।

रे मन.

जप ले बीज मंत्र राम नाम का

शिव जी जिसे सदा जपते हैं

जिसने साधा है प्रभु को

उसकी झोली वे भर देते है ।

रे मन

भटक रहे हम योनि योनि

अंध कूप में पड़े हुए हैं

तेरी कृपा बिन कुछ नहीं मिलता

हे राम ! तेरे ही शरण आते हैं ।

रे मन.

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