राम जप! राम जप! राम जप राम रे।
घोर भव नीर निधि, नाव केवल नाम रे॥
रामनाम महामणि, तोड़े जगत जाल रे।
कल्पवृक्ष फलदाता, करता काज सर्वकाल रे।
भक्ति-मुक्ति का सार यही, अमृत समान रे।
राम जप! राम जप! राम जप राम रे॥
वेदों का पावन सार, रामनाम अपार रे।
महामंत्र महाशक्ति, जग को दे उद्धार रे।
शारदा, शेष, शिव भी, नेति नेति पुकार रे।
राम जप! राम जप! राम जप राम रे॥
एक साधना, एक भक्ति, सिद्धि का द्वार रे।
कलिकाल में यही सरल, जीवन आधार रे।
योग-जप सब कठिन यहाँ, रामनाम साकार रे।
राम जप! राम जप! राम जप राम रे॥
जग में मद-मोह मत्सर, काट दे राम रे।
साँस अन्तिम में भी, यही तो संगधाम रे।
रामनाम ही अंतिम साथी, यही आराम रे।
राम जप! राम जप! राम जप राम रे॥