हे माली ! चुन लो मुझे देर करो न
कहीं डाल से गिर न पड़ूँ मैं
तुम्हारी माला में गुँथ जाऊँ
प्रभु के श्री चरणों में चढ़ूँ मैं
जाने कब दिन बीत जायेगा
घन घोर अंधेरा घिर जायेगा
प्रभु पूजा की बेला तब तक
कब चुपके से निकल जायेगी ।
अपने में सुन्दर रंग रूप धरा है
सुरभि सुधा से हृदय भरा है
प्रभु सेवा में ले लो तुम
शुभ समय कहीं निकल न जाये
हे माली ! तोड़ मुझे लो देर करो न
कहीं धूल में गिर न पड़ूँ मैं ॥