पुरानी यादों की छठी श्रृंखला
में ननिहाल की चर्चा आज हम करते हैं
पुरानी यादें साझा करते हैं
नाना नानी के घर की तो बात ही क्या कहने
जितनी भी चर्चा करे
सब कम ही तो लगता है
हर बच्चे उतावले रहते हैं
नानी के घर जाने को तत्पर रहते हैं
भगवान जाने यह कैसा बंधन है?
पर यह रिश्ता तो जग में न्यारा होता है
मैं भी तो इसी क़िस्म का बालक था
अपने मामा के साथ जाने
को हरदम तत्पर रहता था
गर्मी की स्कूल की छुट्टी जैसी ही हो जाती थी
मेरे छोटे मामा जी मुझे लेने आ टपकते थे
बहुत प्यार उनसे मैं करता था
साथ में उनके मैं चल पड़ता था
साईकिल से वे आते थे
डंडे पर मैं उनके बैठा करता था
खरी खरी वे बोलते थे
कुछ भी लाँक लपट नहीं रखते थे
पर दिल से वे अच्छे थे
सभी का ध्यान वे रखते थे
उनका भजन “ममता तू न गयी रे मेरे मन से”
आज भी याद आता है
मन ही मन वे ये पंक्तियाँ गुनगुनाया करते थे
मुझे भाव उस समय समझ में नहीं आता था
मैं तो एक अबोध बालक था
अब ये पंक्तियाँ समझ में आयी
मुझे अपना जीवन जीने का राह दिखाई
नाना नानी से मिलकर मैं ख़ुश हो जाता था
वह अपना घर ही तो समझता था ।
पुरानी यादें हैं यादो का क्या
बच्चों के साथ ख़ूब धमा चौकड़ी होती थी
समय का पता नहीं चलता था
गन्ने के खेतों में ज़ाया करते थे
ताजे गन्ने चूसा करते थे
गन्नों को कोल्हू में पेरा जाता था
पीस कर रस निकाला जाता था
उसे कराहों में खौलाया जाता था
स्वादिष्ट गुड बनाया जाता था
रात रात भर बैठा रहता था
बड़ो का साथ पूरा मैं देता था
गरमागरम गुड़ और राब छककर हम खाते थे
बहुत ही स्वादिष्ट लगता था
टमाटर के खेतों में ज़ाया करते थे
ताजे ताजे लाल टमाटर नमक लगाकर खाते थे
बागों से पके आम तोड़ते रहते थे
झोले भरकर हम घर लाते थे
मेरी नानी ख़ूब खुश हो जाती थीं
आम का रस वह निकाला करती थी
मुझे खिलाया करती थी
पढ़ाई लिखाई का न कुछ झंझट था
छुट्टी का महीना मस्ती में कटता था ।
पुरानी यादें हैं यादो का क्या
नाना नानी, मामा मामी
सबका का मैं तो प्यारा था
घर भर का राजदुलारा था
सभी ध्यान मेरा ख़ूब रखते थे
मनोरंजन ख़ूब कराते थे
कम्पट टाफी मुझे लाते थे
दूसरे बच्चों के भीड़ भाड़ में
चुपके से पकड़ा जाते थे
कितना ध्यान मेरा रखते थे
आसपास मेला जब लगता था
मामा जी के साथ घूमने जाता था
गर्मागर्म दूध जलेबी छनती थी
छूल के पत्तों में चाट हम खाया करते थे
मिट्दी के खिलौने ख़रीद कर लाते थे
साथी बच्चों के साथ जमकर खेला करते थे
ख़ूब मस्ती हम करते थे
पुरानी बातें सब बीत गयी
इतिहास के पन्नों में सब समा गये
उनकी यादें ही तो अब जीवन का हिस्सा है
जब भी ये प्यारी यादें स्मृतियों में आती हैं
मन को कचोट जाती है
सब गुजरा गुजरा लगता है
अब तो वह कोई नया जीवन लगता है !
पुरानी यादें हैं यादो का..
उमानाथ साहित्य