पूज्य पिताजी के नाम

हे मेरे

परम पूज्य स्व० पिताजी

करता हूँ सर्वप्रथम

सादर नमन मैं आपको,

समर्पित है स्मृतियों के

शृद्घा सुमन कुछ आपको !

जितनी भी चर्चा करूं मैं आपकी

सूरज को दीपक दिखाने जैसा लगता है

आपका महान व्यक्तित्व

एक चमकते दर्पण जैसा लगता है

आप जैसा कोई नहीं

मेरे लिये आप केवल आप हैं ।

आपके पोते ने एक दिन

मेरे अन्तर्मन को टटोला है

लिखूँ कुछ, साझा करूँ कुछ

विस्मृत यादों के पन्नों के

छिपे हिस्से आपकी, मेरे साथ की

आपके असीम प्यार की !

आप केवल मेरे पिता नही

भगवान मेरे आप हैं

मेरा साहस,मेरा संबल

मेरी पहचान आप है,

मेरा रुतबा, मेरा मान

मेरा अभिमान आप है !

पिता एक धूप का कतरा होता है

तो एक कोमल छांव भी है,

कठिनाइयाँ आये जीवन में

पिता कुशल छत्र भी है

सब कुछ आपके अंदर था

बहुत प्यार मुझे करते थे ।

जहां तक स्मृतियों की बात है

कुछ बयां यहां मैं करता हूँ ,

बचपन की यादें साझा करता हूँ

बचपन मेरा बहुत प्यारा था

घर भर का मैं राजदुलारा था

परिवार का जो पहला बेटा था !

स्वभाव से मैं नटखट था

सबकी पलकों में मैं बसता था

मेरी हर माँगें आप पूरी करते थे

बहुत प्यार मुझे करते थे

आँखों में बैठाये रखते थे

मैं आपके जिगर का टुकड़ा था !

कभी सख़्त वृक्ष, तो कभी

फूलों की डाली बन जाते थे

कभी खुद एक खेल

तो कभी खिलाड़ी बन जाते थे

असीम प्यार मुझसे करते थे

पर कभी नहीं जताते थे ।

मैं लाड़ प्यार में पला हुआ

पढ़ा लिखा और बड़ा हुआ,

सारे सपने मेरे पूर्ण हुये

सबके मनोरथ सफल हुये,

सब कुछ तो मैंने पाया है

पर असमय आपको गँवाया है !

आदर्श पिता का पूरा धर्म आपने निभाया है !

संघर्षों से आपका नाता था

हर परिस्थितियों से लड़ना आता था

जो कुछ भी मन में ठान लेते थे

उसे हर संभव पूरा करते थे

संयुक्त परिवार के निर्वाहन मे

पूरा धर्म निभाते थे ।

समाज में आपकी प्रतिष्ठा थी

हर मामले में बुलाये जाते थे

बड़े बड़े घरेलू झगड़ो को

सरलता से सुलटाया करते थे

आप धर्म परायण व्यक्ति थे

सब ग्रंथों का पाठन करते थे ।

आप एक आदर्श शिक्षक थे

हर बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते थे

उनकी चिंता करते थे

हर संभव मदद पहुँचाते थे

ईमानदारी आपका गहना थी

सत्य मार्ग से कभी न हटते थे ।

आप ने सत्कर्म का मार्ग अपनाया था

हम सबको यही पाठ पढ़ाया था,

दीन दुखियों की सेवा में तत्पर रहते थे

हर संभव सहायता करते थे,

आदर्श जीवन जीना मैंने आपसे सीखा था

जीवन के मूल्यों को आपसे ही समझा था ।

एक वेदना है आज मेरे मन में

आपको असमय ही हमने खोया है

कभी भूल नहीं पाऊँगा,

बनी रहेगी हृदय में सदा कसक

आपकी सेवा का कुछ

सुअवसर नहीं पाया है !

ये मन के मेरे भावपूर्ण,श्रृद्धा स्वरूप

कुछ शब्द समर्पित करता हूँ

आप जहां भी हो नव जीवन में

या ईश्वर के परमधाम में,

आनन्दित हो, प्रफुल्लित हो,

प्रभु के श्री चरणों में स्थान मिले ।

आपका प्यारा पुत्र

उमानाथ

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