प्रेम का प्याला पी लिया जिसने
मानो अमृत रस का पान किया
नहीं रहती सुध बुध तन की
प्रेमी से जब नाता जोड़ लिया
पीती रही ग़मों का प्याला
प्रेम का प्याला मीरा गटक गयी
कृष्ण प्रेम का रंग चढ़ा जब
राणा प्रेषित विष पान किया ..
मन्दिर मन्दिर मीरा घूमे
नृत्य करे साधु संग वह
पति रूप में कृष्ण को देखे
जगत को मिथ्या मान लिया ..
बज गयी कृष्ण की बाँसुरियाँ
कृष्ण भक्ति में जीवन ढाल लिया
कृष्ण प्रेम का प्याला पीकर
मानो अमृत रस का पान किया
प्रेम ही शक्ति प्रेम ही भक्ति
प्रेम में पूरी सृष्टि घुली हुई
प्रेम रस को पी लिया है जिसने
भव सागर से बेड़ा पार किया ..
प्रेम रस का प्याला पीने वाला
प्रेम में गहरे गोते लगाता है
नहीं रहती सुध बुध तन की
प्रेमी से जब नाता जोड़ लिया ।