बूढ़ी माँ का दर्द
कभी माँ के पास बैठकर पूछो बस इतना ही कहना, “थक गई हो क्या?” रात के ग्यारह बजे थे,सन्नाटा था, घर सोया था,बस रसोई से छन–छन की ध्वनि,कुछ कहती-सी, कुछ रोया था।कब सोती है, कब जगती है,किसी को नहीं है भान,दिन भर झाड़ू–पोछा करती,मां मशीन बनी न रही इंसान?नींद नहीं थी आँखों मेंजलते थे प्रश्न … Read more