बूढ़ी माँ का दर्द

कभी माँ के पास बैठकर पूछो बस इतना ही कहना, “थक गई हो क्या?” रात के ग्यारह बजे थे,सन्नाटा था, घर सोया था,बस रसोई से छन–छन की ध्वनि,कुछ कहती-सी, कुछ रोया था।कब सोती है, कब जगती है,किसी को नहीं है भान,दिन भर झाड़ू–पोछा करती,मां मशीन बनी न रही इंसान?नींद नहीं थी आँखों मेंजलते थे प्रश्न … Read more

कुदरत का कर्ज

कभी किसी के आँसुओं की वजह न बनना,इससे बड़ा कोई पाप नहीं ॥ कभी किसी का दिल न तोड़नाइससे बड़ा कोई विश्वासघात नही । कुदरत का हिसाब बड़ा सख्त होता,हर दर्द ब्याज सहित जुड़ता जो दिया तुमने, वही लौट आएगा,कभी खुशी बन, कभी आघात बन जाएगा।धोखा, छल, या टूटा भरोसा कर्म का चक्र सब सिखा … Read more

रूप और स्वरूप का श्रृंगार

स्त्री का श्रृंगार रूप में प्यारा,पुरुष का श्रृंगार कर्म उजियारा।दोनों ही प्रकृति के स्वर सुंदर,एक स्नेह भरा, एक तेज हमारा।।फूलों-सी कोमल, चाँदनी-सी निर्मल,ममता में डूबी नारी की भावनाएँ।आँचल में बसती दया की नदियाँ,उससे ही महके जीवन की छायाएँ।।रूप उसका जैसे कली का नज़ारा,पुरुष का श्रृंगार कर्म उजियारा।।पुरुष है साहस, विश्वास की मूरत,उसके पथ पर दीपक … Read more

बूढ़ी माँ का दर्द

बूढ़ी माँ का दर्द कभी माँ के पास बैठकर पूछो बस इतना ही कहना,“थक गई हो क्या?” 🌷रात के ग्यारह बजे थे,सन्नाटा था, घर सोया था,बस रसोई से छन–छन की ध्वनि,कुछ कहती-सी, कुछ रोया था।कब सोती है, कब जगती है,किसी को नहीं है भान,दिन भर झाड़ू–पोछा करती,मशीन है या है इंसान?नींद नहीं थी आँखों में,जलते … Read more

गीत कर्म का दीप

हे प्रभु! न किसी को पीड़ा दूँ, न मैं कोई पाप करूँ,मानव तन पाया जो मैंने, पूर्ण सार्थक इसे करूँ॥न हो किसी को पीड़ा मुझसे, ऐसा जीवन बीते,मानव तन पाया है जो, सत्कर्मों में ही रीते।ना प्रसिद्धि की चाह रहे, ना ईर्ष्या मन में धरूँ सत्य-अहिंसा के पथ पर मानव धर्म मैं करूँ॥दीन-दुखियों का साथ … Read more

जब सन्नाटा बोल उठा गीत

गीत : जब सन्नाटा बोल उठाकहाँ गए वे मिलने वाले डोरबेल अब नहीं बजती,घर में कोई न आता, न पुरानी महफ़िल सजती॥. सन्नाटा बोल उठा दिखते घर में एक-दो जन हैं,उनमें भी अब सन्नाटा।सुबह ढले, फिर शाम उतरे,पर मौन नहीं है घटता।जीवन बन गया बोझिल-सा,नीरस पथ यूँ ही कटता।दीवारें भी मौन खड़ी हैं,कोई बात नहीं … Read more

नैनों की भाषा गीत

नैनों की भाषा कह न सके कोई,मन की गहराई माप न सके कोईनयनों से नयन जब मिल जाते हैं बिना कहे सब कुछ कह जाते हैं । मौन अधर पर शब्द न आते,फिर भी भाव बहा जाते हैं नयन मिले तो जग थम जाए,सब बंधन ढहा जाते हैं प्रीत जहाँ सच्ची हो जाए,वहाँ प्रभु स्वयं … Read more

भीष्म की पीड़ा

भीष्म तीर शैय्या पर थे सोये नियति से लाचार शब्द न निकले होंठ से, अन्तर्मन से हुई पुकार हे कृष्ण!! बताओ आप ही, समझो मेरी पीड़ा,क्यों ऐसा जीवन दिया जीवन भर रहा लाचार ।युद्ध लड़ता था अपने आप से, दोनों थे मेरे रक्त,कैसे मारता मैं किसी को, कितना था मैं संतप्तआप तो साक्षात जगदी़श्वर हैं … Read more

किस ओर जा रही तू जिंदगी

किस ओर जा रही तू ज़िंदगी,हर राह में दिखती तू अजनबी,चेहरों के बीच तन्हाई है,रिश्तों में अब बस औपचारिकता सी॥हर मोड़ पे यादें बिखरीं पड़ीं,कुछ हँसीं, कुछ आँसू जुड़ीं,जो पास थे, अब दूर हुए,बातें रह गईं अधूरी सी।नज़रों में चमक तो है मगर,दिल में वो गर्मी अब नहीं,भीड़ में भी खालीपन है,हर चाहत अब मजबूरी … Read more

मेरी कलम मेरा संबल

मेरी कलम ही मेरी ताकत, मेरा चिंतन ही मेरा संबल।संघर्षों में ढूँढ लिया मैंने, हर चुनौती का सुंदर पल॥कुछ पटल न बुलाते मुझकोजैसे मैंने कुछ छीना हो, पर सत्य की राह पे चलने कामुझको गर्व नसीना हो, झूठ जहाँ मखमल ओढ़े हैमैं सत्य का उजियारा पल॥मेरी कलम ही मेरी ताकत॥डरते वो जो नकल से जीतेमैं … Read more