माँ सरस्वती
हे हंस वाहिनी ! ज्ञान दायनी ! तू तो जगत की माता माँ तेरा दर्शन मिल जाये माँ, जीवन मेरा धन्य हो जाये माँ ।तू कालिदास की है आराध्या कुंठित बुद्धि को तीक्ष्ण करे, जिव्हा पर सदा बसती है माँ मूक को वाणी दे जाती माँ ।हृदय के भावों की अभिव्यक्ति मेरे स्वप्नों में तू … Read more