बसंत

ऋतुओं की रानी मैं बसंत हूँ फूलों में हूँ मैं कलियों में खेत खलिहानों में मैं दिखती,दिखती हूँ हर गलियों में ॥ कलियाँ कलियाँ हैं मुस्काई सुगंधित फूल खिले बन उपवन कुसुमित किंसुक के फल सुन्दर प्रकृति प्रमुदित प्रफुल्लित मन । पक्षी गाते गीत मनोहर कलरव करते हैं मस्ती में बसंत की नयी ऊर्जा दिखती … Read more

दो अंजाने

दो अंजाने एक दिन मिलते, प्रणय सूत्र में बंधते हैं ,आपस में अजनबी हैं दोनों दाम्पत्य जीवन पथ पर चलते हैं ।दो राही पर पथ एक है साथ साथ वे चलते हैं, एक दूसरे की भावनाओं को हृदय में आत्मसात् वे करते हैं ।चलते रहते, बातें करते, वह राह सुखद हो जाता है, एक दिन … Read more

टूटा हुआ फूल

टूटा जब वह फूल डाली से स्वयम् के दुर्भाग्य को कोसा,कहाँ होगा अब वतन उसकान जाने अब आगे क्या होगा । अभी तक गुले गुलज़ार रहता था,चमकता था, महकता था, धूमिल हो गयी सब चमक उसकी,न जाने अब आगे क्या होगा । अर्पित हो जाता वह प्रभु कोजीवन धन्य उसका होता, नियति में लिखा क्या … Read more

वट वृक्ष की डाली

टूट जाती जैसे इंसान की बाँहें,टूट गयी वट वृक्ष से डाली, क्या करती कुछ समझ न पायी, अलग हुई वट से वह सुन्दर डाली । हरे भरे पत्तों की घनी वह डाली हर इंसान को छाया देती थी,पर इंसान की छुद्र पिपासा ने, काट दिया वृक्ष की वह डाली ।हाथ पाँव यदि कट जाये इंसान … Read more

कडुवा सच

जो अपने हैं अपनों से मिलने से कतराते हैं, पर ग़ैरों में जो अपने हैं,ग़ैरों से मिलने आते हैं ।अपने तो अपने होते हैं, पर देर से समझ में आते हैं, चिड़िया चुग जाये खेती को, तो सिर धुनकर पछताते हैं । सूर्य अस्त हो जाता है,अगली सुबह ही लौटकर आता है,पर मन विदीर्ण हो … Read more

रामनवमी

रामनवमी मेरे प्रभु की आये,हम कैसे गुणगान न गायें, शुभ अवसर है राम जन्म का, मिल जुलकर हम प्रभु गुण गायें ।अन्तर्मन में छिपे तम को मारे,ईर्ष्या, द्वेष, सब दूर भगाये,प्रेम की गंगा सदा बहाये, आओ हम सब प्रभु गुण गायें ।राम तत्व है सबके भीतर,आओ मिलकर हम उसे जगायें,शबरी जैसा प्रेम दिखाये,जूठे बेर भी … Read more

कर ले बंदे हरि गुण गान

एक ही सत्य तो है इस जग मेंवह है केवल हरि का नाम, रे मन ! तू क्यों है उदासकर ले बंदे हरि गुणगान । मृगतृष्णा में कब तक भागे कुछ न मिलता नियति के आगे,यह जीवन है चार दिनों काकर ले बंदे हरि गुण गान । चंचल मन को स्थिर कर लेत्याग दें तू … Read more

रामचरितमानस पाठन

नमन करें महादेव को,जगद्दननी का शुभ आशीर्वाद मिले,माँ वीणा वादिनी का ध्यान करें,नित्य रामायण वाचन शुरू करें । बाल्यकाल से शुरू करें, दो चार चौपाई नित पढ़ा करें,महामंत्र है हर चौपाई, हृदय तल में इसे आत्मसात् करें ।शंकर पार्वती का मंगल विवाह, प्रभु का अयोध्या जन्म प्रसंग, सीता स्वयंवर और धनुष भंग, लक्ष्मण परशुराम संवाद … Read more

ऋतुओं की रानी वसंत

ऋतुओं की रानी मैं तो वसंत हूँ फूलों में मैं हूँ कलियों में मैं हूँ खेत खलिहानों में मैं हूँ मैं तो वसंत हूँ ।इधर घूमती हूँ उधर घूमती हूँ बड़ी बावली हूँ न कुछ फ़िक्र है न किसी का डर है मैं तो वसंत हूँ ।पतझड़ ही मैं हूँ नव सृजन भी तो मैं … Read more

सानिध्य

सानिध्य प्रभु का जब मिलता है वरदान स्वरूप यह होता है,गोवर्धन पर्वत भी प्रभु उठाते हैं ब्रजवासियों की इन्द्र कोप से रक्षा करते हैं ।सानिध्य बड़ों का जब मिलता है,आशीर्वाद स्वरूप यह होता है,हर कदमों पर सफलता मिलती है, आकाश की बुलंदियों को छू लेते हैं ।सानिध्य जीवन में ज़रूरी है, सुरक्षा कवच का काम … Read more