बसंत
ऋतुओं की रानी मैं बसंत हूँ फूलों में हूँ मैं कलियों में खेत खलिहानों में मैं दिखती,दिखती हूँ हर गलियों में ॥ कलियाँ कलियाँ हैं मुस्काई सुगंधित फूल खिले बन उपवन कुसुमित किंसुक के फल सुन्दर प्रकृति प्रमुदित प्रफुल्लित मन । पक्षी गाते गीत मनोहर कलरव करते हैं मस्ती में बसंत की नयी ऊर्जा दिखती … Read more