फँसे सांसत में मेरे प्राण हास्य

फँसे साँसत में मेरे प्राणचलाती वो तो नैना वाण, कहता फिर भी मेरी जानतुम बिन कैसे जिये । यही तो है असली पति की पहचान मन में इसे सब लो ठान, पीछे पीछे पति घूमता हर घुड़की वह सहता रहतामौन धारण कर सुनता रहता, झाड़ू पोंछा घर का करता किचन का पूरा कार्यभार सँभालता ऊपर … Read more

भरत चले भाई राम को मनाने

आँखों में आँसू, मन में तड़प है भरत चले भाई राम को मनानेत्याग, प्रेम की ज्योत जलानेभरत चले भाई राम को मनाने॥अयोध्या शोक में डूबी नगरिया,सूनी पड़ी हर गली डगरिया।पशु-पंछी भी मौन हुए,भरत चले राम को मनाने॥दशरथ राजा स्वर्ग सिधाए,राम-लखन-सिया वन को जाए।भाई बिछोह में मन घबराए,भरत चले राम को मनाने॥कृश तन, नंगे पाँव चलें,हृदय … Read more

भगवान भी रोते हैं

मन में एक प्रश्न उठा क्या कभी ईश्वर भी रोता है ? सही उत्तर यही प्रतीत होता है ऐसा संभव ही नही है ..सृष्टि के रचयिता को किस बात का दुख है जो वह रोये कदापि नही .परन्तु ऐसा नहीं है .. ऐसा भी होता है जब भगवान रोते हैंभगवान श्रीकृष्ण मित्र सुदामा के पैरों … Read more

राम और कृष्ण

राम कृष्ण दो नाम अलग दोनों भिन्न भिन्न दिखते हैं दोनों ही है विष्णु अवतारी दोनों एक ही होते हैं ।युग युग की अपनी महिमा है नर लीला प्रभु वैसी करते हैंदोनों ही तो विष्णु स्वरूपदो रूप पर एक ही होते हैं ।बारह कलाओं से राम चन्द्र नियमों में बंधे से दिखते हैं,कृष्ण सुशोभित सोलह … Read more

कहाँ गयी चिट्ठियाँ

लुप्त हो गयी वह इतिहास के पन्नों में.प्यारी चिट्ठियाँ…छोटा सा पीला पोस्ट कार्ड, नीली अन्तरदेशी लिखने का ज़बर्दस्त सलीका.जिसकी शुरुआत होती थी “ऊं गणेशाय नमः “ ऊं परमात्मने नमः से.परम पिता परमेश्वर की असीम कृपा से यहाँ सब कुशल है आशा है वहाँ पर सब कुशल से होगे .भगवान की कृपा सब पर बनी रहे.चिट्ठी … Read more

हौसला

जीवन में हार नहीं मानना जीत की असली निशानी है हौसला रख तू चट्टानों से भी टकराने की.उड़ान भर ऊँचे क्षितिज तक मत कर चिंता धरती पर गिर जाने की .छू ले ऊँचे आसमान को बुलंदियों के झंडे फहराने तक, तू समंदर सा गहरा है..तो कोई गम नहीं मुझे हौसले मेरे भी चट्टान से कम … Read more

जप ले राम का नाम भजन

साधक, सिद्ध और योगी गण,नित जपते हृदय में प्रभु का नाम पाते वे अनुपम, अनिर्वचनीय विश्राम,रे मन ! जप ले तू राम का नाम । जो नित राम नाम जपते हैंमिट जाते उनके भव संकट सारे,जीवन में राम नाम ही है आधार, रे मन ! जप ले तू राम का नाम ।चारों युगों में है … Read more

दो वृद्ध दम्पत्ति

हे प्रियतमा! उठो, हृदय प्रिय, देर हो गई, सूर्य रश्मि फैल गई, सब ओर उजियारा छाया। परिन्दों ने छोड़ा अब अपना बसेरा, क्यों तू आज पर नहीं उठती? ब्रह्म मुहूर्त में उठना तेरी पुरानी आदत थी, नित्य कर्म पूरा कर देती थी चाय मुझे, आज तेरी आवाज़ नहीं सुनी मैंने, मेरा मन बार-बार घबरा रहा … Read more

केवट भक्ति

हे केवट ! तेरे भाग्य पर इतराता हूँ तेरी राम भक्ति पर शीश नवाता हूँ कितने पुण्य कर्म किये थे तूने साक्षात प्रभु राम तेरे घाट पे आते हैं ।जो भव सागर से नैया पार कराते हैं कहते हैं हे केवट ! तू मुझे गंगा पार करा दे !तू अपनी शर्तों पर उन्हें नचाता है … Read more

रे मन मत हो उदास

रे मन ! तू क्यों है उदासछोड़ मत जीने की आस, कुछ हंस ले, कुछ बोल ले, हंसने का शुल्क नहीं लगता है । रे मन मत ..सुबह से मुँह लपेटे पड़ा है तू जैसे बेहोशी छाई है, किस बात का ग़म है तेरे जहन, अवसाद में घिरा तू रहता है ।रे मन .. नीले … Read more