कन्या भ्रूण की वेदना

मैं अधखिली कली हूँ तेरी बगिया की मुझको पापा नही कुचलो तुम घर आंगन बगिया महकाऊँगी असमय गर्दन न मोड़ो तुम !!अभी तो मैं एक कन्या भ्रूण ठहरी प्राणों का भी ठीक से नही संचार हुआसमझ ली पर आपके हृदय की मंशा आप दोनों को मेरी नहीं ज़रूरत है .भला दोष इसमें है क्या मेरा … Read more

चारित्रिक गुण

डूबो तो इतना डूबो समुद्र तल से मोती चुन लाओ तुम ! उड़ो तो इतना उड़ो नभ की ऊँचाईयां नाप लाओ तुम ॥ मन तो बहुत ही चंचल है कंट्रोल में इसको लाओ तुम ।फिसलने की फ़ितरत इसकी सबक इसे सिखाओ तुम ॥छिछले ज्ञान का मूल्य नही मिथ्या भ्रम मत पालो तुम । ज्ञानी यदि … Read more

अयोध्या

चलो चलें अयोध्या मेरे प्रभु राम आये हैं अहो भाग्य दर्शन कर ले सियाराम आये हैं ! शुभ घड़ी अब आ ही गई है वर्षों से जिसकी प्रतीक्षा रही है राम मन्दिर भव्य बनकर खड़ा है राम भक्तों का जमकर तांता लगा है चलो चलें अयोध्या श्री राम आये हैं हाँ हाँ मेरे प्रभु सिया … Read more

दोस्त की यादें

ऐ दोस्त !एक मलाल है तुझसेपर कहूँ कैसे तू तो मेरे बीच अब नहीं रहा ..क्यों पाले था वैमनस्यता ज़िन्दगी अकेले जीता रहा भूल गया वो बचपन जो साथ साथ खेले थे अहम् में जीता रहा मैं बड़ा हूँ मैं हूँ स्वयंभू तुझे बचपन का दोस्त भी न दिखा उससे भी दग़ाबाज़ी करता रहा एक … Read more

बचपन की कहानी

बीते समय की हुई अब कहानी बड़ी ख़ूबसूरत थी वह जिन्दगानी । कड़ी धूप में अपने घर से निकलना जूते न चप्पल चुपके से खिसकनारास्ते में उड़ती तितलियों को पकड़ना फड़फड़ाती उन्हें देख हवा में उड़ाना काग़ज़ की नैया उसे पानी पर तैराना चींटों को शरारत से उस पर बैठाना बड़ी ख़ूबसूरत थी वह ज़िन्दगानी … Read more

मां की यादें

माँ तू मेरा चित्त चुराती है देर रात नींद नहीं आती है जब जब दुखी मैं होता हूँ तू मेरे सपनों में आती है ।मुझको बहुत समझाती है थपकी देकर तू सुलाती है मैं छोटा मुन्ना बन जाता हूँ मुझे लोरी गाकर सुनाती है ।जिस दिन तू नहीं दिखती है भीगी पलकों में मैं सोता … Read more

संयुक्त परिवार

वो पंगत में बैठ के साथ साथ जेंवनाअपनों की संगत में रिश्तों को जोड़ना यादें ही शेष हैं कुछ भी नही अवशेष है संयुक्त परिवार चढ़ा स्वार्थ की भेंट है । दादा की लाठी पकड़ गलियों में घूमनादादी का बलैया लेना माथे को चूमना संस्कार और संस्कृति रग रग में बसते चढ़ गया सब कुछ … Read more

जीवन कैसे जिये

गतिविधियों का मत बनो दास कुछ हास करो कुछ परिहास करो जीवन की आपाधापी से समय निकालो कुछ अपने लिए !मत बनाओ जटिल जीवन को सरल सुगम जीवन शैली अपनाओ विश्लेषण जीवन का बंद करोजीवन जिओ परमार्थ के लिए !मत सोचो कभी अपने मन में तू ही इक कर्ता है तू तो है इक निमित्त … Read more

प्रेम की बोली मुक्तक

मीठी बोली बहुत ही प्यारी काम बहुत यह करती है क्रोध की बोली बहुत ही तीखी मिर्ची जैसी लगती है बात बात में झल्लाना होता विवेक शून्यता का लक्षण मृदुल बोली ही ऐसी होती बिगड़ी बात भी बनती है । अपनी बात को मनवाना पागलपन जैसी हरकत होती है प्रेम ऐसा हथियार है जो दुश्मन … Read more

रे मन तू चिंता मत कर

रे मन ! तू चिंता मत कर !!चिंता होती चिता समान तन मन को करती जर्जर बड़े भाग्य से मानव तन मिलता इसे व्यर्थ तू न कर यह जीवन अनमोल बहुत है प्रभु की अद्भुत देन है आंक तू जीवन के मूल्य को हर पल ख़ुशियों में भर ।चिंता मन में जब सताये बैठ जा … Read more