कन्या भ्रूण की वेदना
मैं अधखिली कली हूँ तेरी बगिया की मुझको पापा नही कुचलो तुम घर आंगन बगिया महकाऊँगी असमय गर्दन न मोड़ो तुम !!अभी तो मैं एक कन्या भ्रूण ठहरी प्राणों का भी ठीक से नही संचार हुआसमझ ली पर आपके हृदय की मंशा आप दोनों को मेरी नहीं ज़रूरत है .भला दोष इसमें है क्या मेरा … Read more