द्रौपदी का बहू उत्तरा को सीख

जब टूटें जग के सब नाते, मौन हो जाए संसार । तब केवल एक सहारा, कृष्ण नाम अविकार ॥बैठी थी पलंग पर उदास सी, उत्तरा भोली नारिद्रौपदी ने स्नेह से समझाया, जीवन का विस्तारकहा बेटी न देखो रिश्ते-नाते, न धन न परिवार,विपदा में जो साथ निभाए, वही सच्चा आधार।सभा बीच मेरी लाज लुटी थी, छूटा … Read more

निर्गुण भजनः दुनिया इक रंगमंच है

दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।आते-जाते काल में, मिलते रूप हज़ार ॥ राजा बने, फकीर बने, पल में धन-दरिदार,हँसते-रोते जीवन कटे, है क्षणिक विस्तार।नाम बिना सब सूना लगे, टूटे मोह-आधार,दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार।तन की माया, मन का छल, सब झूठी शान,साँस की डोरी टूटते ही, रह जाए पहचान।साथ न जाए कुछ … Read more

आशा का दीप दोहे आधारित

रही आस कह श्वांस से,धीरज धरना सीख |बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख ॥टूटी नाव भरोस की, लहरों से क्या हार,जो थामे प्रभु का चरण, पहुँचे भव से पार।आँधी बोले दीप से, जलना मत तू दीख बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख ॥सूखी धरती कह रही, बादल का विश्वास,धीरज की हर … Read more

आस कहे श्वास से

आस कहे श्वास से, धीरज धर ले भाई,बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।जो खोजे बाहर जगत में, खाली लौटे हाथ,अंतर घट में जो उतरे, पाए हरि का साथ।झूठी आस न पाल रे मन, टूटे सब परछाई,बिन माँगे मोती मिलें, माँगे भीख न पाई।न तेरा कोई, न मेरा कोई, माया का है खेल,नाम बिना … Read more

नियति और कर्म सवैया

नियति अडिग पर्वत सम दिखती, कर्म प्रबल धारा बन जाता मन संकल्पी हो तो राही, बाधा से भी मार्ग रचाता भाग्य लिखे जो धूमिल रेखा, पुरुषार्थ उसे स्वर्ण बनाता जिसने श्रम की ज्योत जलायी, अंधियारा सब दूर हटाता।।बीज पड़े पथरीली धरती, फिर भी अंकुर फूट निकलते।हाथों की मेहनत से सूखे, वृक्ष हरे रसधार पिघलते।कर्म सजीव … Read more

झूठ का जीवन रास न आये मन

रे मन झूठ का जीवन रास न आएसाँसों की ये माला टूटत जाए।मन व्याकुल है, भीतर जंग लगेकाहे को माटी में मोल रचे, कपड़ा–रोटी–छप्पर का पल भर का यह साज सजे, शानो शौकत मिथ्या ये शानकल तक अपना, आज परायजिन पर गुमान किया था तूनेसब यम के द्वार बिखर जाए॥जीवन भर जो जोड़–घटायावैद्य की चौखट … Read more

कल करे सो आज कर

साष्टांग नमन श्रेष्ठ चरणों में,जिनसे उजियारा जग में छाया,आज फिर सूरज मुस्काया है,ईश्वर ने नया जीवन दिलाया।भाग रहा है समय निरंतर,पल–पल फिसलता हाथों से,चौबीस घंटे सबको मिले हैं,फिर भी कुछ खाली रह जाते हैं।कल का सूरज दिखे न दिखे,इसका कोई भरोसा नहीं,अगले क्षण की साँस भी हमको,मालूम नहीं यह होगी कि नहीं।कबीर कहें सुन लो … Read more

तू बस धर्म निभा ओ प्राणी

तू बस धर्म निभा ओ प्राणी,फल की चिंता छोड़ दे।कर्म ही है तेरा अधिकार,मत सोच जीत या हार॥हर मन भीतर कुरुक्षेत्र सजा है,इच्छा–कर्तव्य युद्ध रचा है।कभी धुंध छाई, राह न सूझे,डगमग डोले जीवन रथ है॥तू बस धर्म निभा ओ प्राणी,फल की चिंता छोड़ दे।भीतर बैठे कृष्ण कन्हैया,सबका लेखा जोड़ दे॥मन का अर्जुन प्रश्न उठाए,क्यों ये … Read more

भक्त भक्ति और भगवान

भक्त, भक्ति और भगवान, तीनों एक ही धारा,जिसने प्रभु की भक्ति पाई, जीवन उसका निस्तारा॥मन में प्रेम हो सच्चा, तो दूरी मिट ही जाती,अंतर से जो पुकारे, उसको राह मिल जाती।पल में भर दें जीवन में, आनंद का फुहारा॥भक्त, भक्ति और भगवान, तीनों एक ही धारा॥भक्ति दीपक जैसी, खुद जल कर जग को बाँटे,हर दुखियारों … Read more

आज के रिश्ते

पहले रिश्ते मन से जुड़े, अब मतलब से बँध जाते हैं,आत्मीयता की ऊष्मा खोकर, शब्द ही शेष रह जाते हैं।बड़ों की डाँट में स्नेह छुपा, अनुभव का था उजियारा,आज जवाब में उत्तर नहीं, बस अहंकार का गुब्बारा।जो बच्चे पलट कर बोल रहे, दोष उनका क्या माना जाए,जब माँ-बाप स्वयं आदर खो दें, संस्कार कहाँ से … Read more