नेता बनने की चाह

मुझे भी नेता बनना है

माननीय कहलाना है

कितना अच्छा लगता है

जब आसमान से फूल बरसता है ।

गर्व की अनुभूति होती है

सीना चौड़ा हो जाता है

मन बल्लियों उछलने लगता है

मयूर नृत्य करने का मन होता है ।

पढ़ने लिखने में तो मैं लम्पट हूँ,

पर इस पोस्ट के लिये पूरा फ़िट हूँ,

नेता अनपढ़ ही तो होते हैं,

पर दिमाग़ से शातिर वे होते हैं ।

नेता का काम बोलना है,

लिखा हुआ केवल पढ़ना है,

बड़ी बड़ी बातें फेंकना है,

झूँठ को सत्य बताना है ।

जनता की सेवा से क्या लेना देना है,

वह तो नंगी भूखी ही अच्छी लगती है,

भूखा पेट रोटी माँगता है

वह लम्बा नहीं सोचता है ।


नस नस में मेरी फ़ितरत है,

हवा की नब्ज पकड़ना है ,

केंचुली समय पर बदलना है ,

कार्य सिद्धि अपना करना है ।

जनता की सेवा मेरे रगों में है,

पुश्तों से चलता आया है,

अनुभव से क्या लेना देना है,

सीधे ऊँची सोपान पर चढ़ना है ।

पाँच वर्षों में केवल एक बार ही,

घर घर वोट की भीख माँगना है,

दादा भैया सब कहना है

गधे को बाप बनाना है ।

वोटर की नब्ज भाँप करके

छद्मवेश धारण करना है,

टोपी अगर पहनना है

तो त्रिपुंड तिलक भी लगाना है ।

हिन्दू मुस्लिम कटे मरे,

धार्मिक कलह कराना है,

अपना उल्लू सीधा करना है

हर मौक़े को जमकर भुनाना है ।

जनता तो भुलक्कड़ होती है

गहरे घावों को भी सह लेती है,

लम्बे लम्बे झूँठे वादे करना है

धीरे से फिर खिसक जाना है ।

Leave a Comment