नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो, मुस्कानों के धूल तुम्हीं हो।
रंग–बिरंगी दुनिया अपनी, उसकी सबसे मूल तुम्हीं हो।
नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो
कूदो–फाँदो, खेलो–कूदो,आँगन को तुम रौशन कर दो।
प्यारी-प्यारी हँसी तुम्हारी,सबका थका हुआ मन हर दो।
तुमसे ही है घर में उजियारा,तुमसे खुशियों की धार
नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो
पुस्तक खोलो, ज्ञान सँजो लो,सपनों को ऊँचा उड़ने दो।
मेहनत की सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते,जीवन को उजला करने दो।
कल की आशा, आज का साहस,तुमसे होता सृजन संभार
नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो
किसी से बैर न मन में रखना,प्यार भरी भाषा अपनाना।
जीवन भर के साथी बनकर,विश्वास की ज्योति जगाना।
तुममें बसती नई सृजन-शक्ति, तुम हो भारत का संसार।
नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो