मोबाइल मेरी सौतन

अब बहुत हो गया,

आज तुम्हें मैं फेंक आऊँगी,

निश्चित ही कूड़ेदान में।

तू मेरी सौतन हो गई,

बहुत मुझे सताती है।

कहती हूँ, जब कोई काम उन्हें,

तू बीच में कूदकर आती है।

हाँ, आज तुझे मैं नहीं छोड़ूँगी,

फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।

जबसे तू मेरे घर आयी,

जीवन में मेरे विपदा लायी।

तुझमें ही ये चिपके रहते हैं,

तुझे साथ-साथ चिपकाये रहते हैं।

तू मेरे फ़िल्म की खलनायिका है,

नायक-नायिका के जीवन में आ कूद पड़ी।

बर्बाद कर दी मेरी ज़िंदगी,

आज तुझे मैं नहीं छोड़ूँगी,

फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।

सखी-सहेली सब छूट गई,

जब मैं इस घर में आयी।

पति के प्रेमपाश में,

मायका भी अपनी भूल गई।

पर जबसे तू इनके जीवन में आयी,

मेरे लिये विपदा लायी।

कौन से शुर्ख़ाफ के पर लगे हैं तुझमें,

वे तुझसे चिपके रहते हैं।

आज तुझे मैं नहीं छोड़ूँगी,

फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।

कहते तू है उनकी कविता,

कविता वे लिखते हैं,

कविता ही पढ़ते हैं,

कविता ही गढ़ते हैं।

भाड़ में गई ऐसी कविता!

आज तुझे हम देख रहे हैं,

बीच में यदि कोई आयेगा,

संग्राम बहुत भीषण होगा।

आज नहीं बचेगी तू मुझसे,

फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।

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