मिट्टी का घड़ा

मिट्टी का घड़ा ✍️

किसी ने पूँछा घड़े से

तुम इतना शीतल क्यों हो?

घड़ा बोला -

शीतलता मेरा गहना है

कोमलता है मेरा स्वभाव

विशुद्ध निर्मल मन है मेरा

जीवन केवल परोपकार..

पैदा हुआ मैं मिट्टी से

अतीत है मेरा मिट्टी का

किस बात का अहम् करूं

जिस पर मैं इतराऊँ

कृतघ्न नही कृतज्ञ हूँ मैं

अपने उस साँवरिया का

जिसने मुझे यह रूप दिया

गढ़ कर मुझे संवार दिया

तू भी तो है मेरा भाई

मिट्टी का इक मात्र खिलौना

क्यूं सच्चाई से भाग रहा

अन्तिम सत्य मिट्टी में मिलना ..

तेरा मेरा संबंध

चला आ रहा आदि काल से

जन्म से लेकर

मृत्यु तक का है नाता

Leave a Comment