मेरी कलम ही मेरी ताकत, मेरा चिंतन ही मेरा संबल।
संघर्षों में ढूँढ लिया मैंने, हर चुनौती का सुंदर पल॥
कुछ पटल न बुलाते मुझको
जैसे मैंने कुछ छीना हो,
पर सत्य की राह पे चलने का
मुझको गर्व नसीना हो,
झूठ जहाँ मखमल ओढ़े है
मैं सत्य का उजियारा पल॥
मेरी कलम ही मेरी ताकत॥
डरते वो जो नकल से जीते
मैं तो सृजन की ज्योति लिए,
हिम्मत मेरा धर्म बना है
हर आँधी में दीप लिए,
हार नहीं, बस कर्म है मेरा,
जीवन मेरा अडिग अचल
मेरी कलम ही मेरी ताकत॥
संघर्षों से सीखा जीना
हर ठोकर में राह मिली,
अंधियारों से निकला सूरज,
जब भी आशा थाम ली,
चलता रहूँ मैं सत्य पथ पर,
यही बना जीवन का फल॥
मेरी कलम ही मेरी ताकत,
मेरा चिंतन ही मेरा संबल॥