मत फेंक नन्ही जान को

मत फेंक नन्हीं जान को, ये तो प्रभु का वरदान है,

मां की आँचल में बसता, सारा संसार महान है॥

ठंडी सड़क किनारे रोती, नन्हीं-सी वो जान

काँप रही थी मासूम काया, ना था कोई सामान,

ओढ़नी भी न दी किसी ने, बस चुप था सारा जहाँ,

क्या पत्थर बन गया इंसान, क्या खो गया ईमान?

कूड़े के ढेर में लिपटी, साँसें अब भी चलती थीं

माँ के आँचल की जगह, मक्खियाँ मँडराती थीं,

क्या दोष है नन्ही गुड़िया का केवल वो एक बेटी है

वो भी तो तेरे कोख से निकली वो तेरी ही पहचान है ।

ना डर इस झूठे समाज से, ना डर हालातों से

ईश्वर देता शक्ति सदा, मातृत्व के जज़्बातों से,

जहाँ करुणा का दीप जले, वहाँ अंधकार मिटे

माँ की ममता जब बोले, कठोर पत्थर भी पिघले॥

हर शिशु एक कहानी है, हर रुदन एक पुकार

ना तोड़ उस धड़कन को, जो जीवन का आधार,

बना उसे तू अपनी ताकत, ना समझ उसे बोझ

उसके संग तेरी तकदीर, तेरे दिल का सोज॥

मत फेंक नन्हीं जान को ये तो प्रभु का वरदान है।

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