मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल
मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल !
मैं अजर हूँ, अमर हूँ, निडर बेहाल,
तेरा शासन तन तक सीमित
मैं आत्मा हूँ असीम विशाल।
तू क्या मुझे मिटा सकेगा
मैं तो सत्य की ज्वाला हूँ,
भस्म भले यह देह हो जाए
पर मैं हरि का उजियाला हूँ।
शक्ति हूँ मैं, शिव का अंश हूँ
मुझमें जीवन का संचार,
मृत्यु तेरा क्या मोल यहाँ
जब भीतर धधक रहा संसार।
तू बाँध सके तो बाँध मुझे,
मैं मुक्त गगन का पंछी हूँ
तेरे द्वार से हँसता जाऊँ
हरिधाम का मैं रथी हूँ।।
मोक्ष न चाहूँ, भय भी नहीं
बस प्रभु चरणों का विश्राम मिले
तेरे आने से डर नहीं अब,
हरि नाम में ही प्राण मिले।
ॐ हरि ओम् हरि ओम् राम
शांति सदा प्रभु चरण महान
मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल