मन मेरे चल उड़ चले

मन मेरे

चल उड़ चले

दूर बहुत दूर

स्वजनों से मिले

बिछुड़ो से मिले

गले हम मिले

जो गये दूर बहुत दूर

मन मेरे

कहाँ तक उड़े

कहाँ पर चले

कुछ भी न पता

सब कहाँ को गये

अब तू ही बता

सब कहाँ को गये?

हम वहीं पर चले

मन मेरे .

मेरे हृदय की व्यथा

तुझसे न कहें

तो बता किससे कहें

मुझे कुछ न पता

अब तू ही बता

स्वजन मेरे कहाँ को गये?

हम कहाँ को चले

मन मेरे

रे मन ! जब तू उड़ा

तू तो उड़ता गया

कहीं न रुका

पर कुछ भी तो न दिखा

चहुं ओर धुँआ ही धुँआ

नेत्र धुंधला गये

अब कहाँ को चले

मन मेरे ..

जब धुँआ कुछ हटा

तू तो आगे बढ़ा

पर कुछ भी तो न दिखा

शून्य गहराता गया

सब हवा में मिले स्वजन मेरे ..

अब करे तो क्या करे

चल अब वापस चले !

मन मेरे .

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