माँ सरस्वती वंदना

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए,

नित आपका गुणगान करे।

शब्द बने सब गीत सुहाने,

आपका ही बखान करे॥

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥

वीणा की झंकार में माँ,

ज्ञान सुधा तू बरसाए।

मूक वाणी को दे स्वर माँ,

हर मन मंदिर सजाए॥

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥

अज्ञान का तम दूर हो माँ,

तेरी कृपा हमें मिल जाए।

प्रेम-भक्ति से भर दे हृदय,

हर जन प्रभु को पाए॥

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥

शब्द-शब्द तेरा वास हो माँ,

भाव-भाव तेरा साज बने।

लेखनी बन साधना मेरी,

कृपा-दृष्टि मुझ पर धरे॥

मेरी भक्ति लेखनी बन जाए॥

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