मां बाप का दर्द

इतना न इतराओ बच्चों

ये माँ बाप तुम्हारी पूँजी हैं

भीख नहीं ये मांग रहे

प्यार में तुम्हारे झुकते हैं ।

तुम्हारी दया के पात्र नहीं

साक्षात देव तुल्य हैं ये

चाहे जितना दुत्कार मिले

आशीर्वाद हृदय से देते हैं ।

हर चुनौतियों से लड़ते हुए

तुमको पाला पोसा है

सहारे की लाठी बन जाओ

तुम्हारा सहारा आज चाहते हैं ।

मैंने इनकी नम आँखों में

हृदय की व्यथा पढ़ ली है

कचोट मिलने पर भी ये

हृदय वेदना नही जताते हैं ।

बैठे रहते किनारे बेंच पर ये

पीड़ा चेहरे से झलकती है

गुमशुम से पार्क के कोने में

सुबक सुबक कर ये रोते हैं ।

निष्ठुर इतना मत बन जाना

इनका ख़्याल जरा रखना

बाट जोहते रहते हैं तुम्हारी

कुशल क्षेम सदा चाहते हैं ।

इतना न इतराओ बच्चों

ये माँ बाप तुम्हारी पूँजी है

भीख नहीं ये मांग रहे

प्यार में तुम्हारे झुकते हैं ।

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