मैं अब बदलने लगा हूँ

दोस्तों !

मैं अब स्वयं को बदलने लगा हूँ

अपने में ही अब मैं जीने लगा हूँ

नही पालता कोई टेंशन की बातें

अपने में ही मैं मुस्कुराने लगा हूँ ।

लेखनी से भी दोस्ती करने लगा हूँ

मन में जो आये वो लिखने लगा हूँ

नही पड़ता बेमतलब के पचड़ों में

सेवानिवृत्ति का लुत्फ़ लेने लगा हूँ ।

बेबसी और लाचारी न मैं पालता हूँ

ज़िन्दगी अपनी शर्तों पर जी रहा हूँ

गिले व शिकवे किसी से न करते

ज़िन्दगी को खुलकर जीने लगा हूँ ।

पर्यटन का भरपूर आनंद ले रहा हूँ

दोस्तों के संग टूरिंग कर रहा हूँ

छुट्टी की चिंता न आफिस का झंझट

खुद बास बनकर हुक्म देने लगा हूँ ।

सपने रहे अधूरे पूरा कर रहा हूँ

खुलकर स्व जीवन जीने लगा हूँ

फेसबुक यूट्यूब के हम हैं दीवाने

उस पर भी दोस्तों से मैं जुड़ा हूँ ।

अपनी सुनाता दोस्तों की सुन रहा हूँ

अनुभवों को अपने शेयर कर रहा हूँ

लगाते हैं जमकर ठहाके हम मिलकर

मानसिक ऊर्जा का टानिक पी रहा हूँ ।

जश्न हम मनाते पार्टियाँ कर रहा हूँ

हम उम्र के साथ जीवन जी रहा हूँ

अपनी कमाई खुद पर खर्च करते

जीवन का भरपूर आनंद ले रहा हूँ ।

बहुत बोझा ढोया अब थक गया हूँ

दौड़ भाग पर विराम लगा चुका हूँ

यारों जीने का नाम ही तो है ज़िन्दगी

ज़िंदगी के बचे लम्हें मैं जीने लगा हूँ ।

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