कुदरत का कर्ज

कभी किसी के आँसुओं की वजह न बनना,

इससे बड़ा कोई पाप नहीं ॥

कभी किसी का दिल न तोड़ना

इससे बड़ा कोई विश्वासघात नही ।

कुदरत का हिसाब बड़ा सख्त होता,

हर दर्द ब्याज सहित जुड़ता

जो दिया तुमने, वही लौट आएगा,

कभी खुशी बन, कभी आघात बन जाएगा।

धोखा, छल, या टूटा भरोसा

कर्म का चक्र सब सिखा जाएगा

सभी बंधे हैं अपने कर्मों से

जो बोया वही तो काटा जायेगा ।

कभी किसी के आँसुओं की वजह न बनना,

इससे बड़ा कोई पाप नहीं ॥

आँसुओं का मोल न आँक सके कोई,

कुदरत उसे खुद तौलती है।

दया, स्नेह, और सच्चाई जो दोगे,

वही सौगात बन लौटती है।।

पाप पुण्य ही होते जन्म के मापदंड

सृष्टि सृजन के यही आधार हैं

कभी किसी के आँसुओं की वजह न बनना,

इससे बड़ा कोई पाप नहीं ॥

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