जो जैसा भी है अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढो
थोड़ा सा प्रेम मिलाओ, प्रेम रस घोलो
दोषों की धूल हटाओ, मन का दर्पण साफ़ करो,
हर चेहरे में रब दिखेगा, बस इतना सा काम करो।
काँटों के संग ही खिलते, बगिया में कोमल फूल
रात अँधेरी चाहे जितनी, भोर करे कबूल,
हर पत्थर में शक्ल छुपी है, मूर्तिकार की आस,
विश्वासों की छैनी लेकर, गढ़ लो अपना विश्वास।
जो जैसा भी अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढो
हर मानव अपूर्ण यहाँ है, ये सच मन में धारो,
कमियों की इस धरती पर, गुणों का दीपक वारो।
नज़र बदलते ही देखो, जगमग सारा संसार,
मन के सुर जब मिल जाएँ, मधुर हो जाएँ तार।
जो जैसा भी अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढो
कड़वी बातें भूल के तुम, मीठे बोल सजाओ,
टूटी डोर संबंधों की, फिर से आज मिलाओ।
थोड़ा धैर्य, थोड़ा साहस, थोड़ा सा विश्वास,
इनसे ही बनता है जीवन, प्रेम भरा मधुमास।
जो जैसा भी अपनाओ, उसमें खूबियाँ ढूँढो