कोरा काग़ज़

हे प्रभु !

मैं हूँ एक कोरा काग़ज़

शून्य, भ्रमित, आवारा पन,

तू मेरा संबल बन जा

कर दूँ तुझ पर पूर्ण समर्पण ।

तम में प्रकाश है तू

निराशा में आशा है तू,

अविश्वास में विश्वास है तू

तन मन मेरा पूर्ण निरूपण ।

मिल जाये मज़बूत हौंसला

एक संकल्प चट्टानों जैसा,

डिगे न पग अपने लक्ष्यों से

बढ़ते चले कर्म पथ पर ।

कलियों में पराग है तू

परागों में भ्रमर है तू ,

सुन्दरता में सौन्दर्य है तू

यह जीवन तेरा तुझको अर्पण ।

जीवन की बगिया महक जाये

खिल जाये कलियाँ मनोहर,

एक सुगंधित अहसास हो मन में

जीवन बने पारदर्शी जैसे दर्पण ।

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