कविता वही जो हृदय से निकले गीत

कविता वही जो हृदय से निकले,

भावों का सागर बन जाए।

कवि की कल्पना जब सजीव हो,

शब्दों में जीवन जग जाए॥

कविता वही कविता वही॥

अश्रु को जो मुस्कान बना दे,

दुख में भी दीप जलाए।

थके हुए मन को जो छू ले,

नई उमंग भर लाए॥

कविता वही कविता वही॥

न हो छलावा, न हो आडंबर,

सत्य का स्वर गूँजे।

प्रेम की धारा बहे जहाँ से,

हर प्राणी हृदय पूजे॥

कविता वही कविता वही॥

कवि की लेखनी जब गा उठे,

मानवता के स्वर में।

बिखरेगी फिर स्नेह की किरणें,

हर दिशा, हर घर में॥

कविता वही कविता वही॥

जो अन्याय पर प्रहार करे,

जो सच की राह दिखाए।

जो जन-जन में चेतना भर दे,

नीति का दीप जलाए॥

कविता वही कविता वही॥

जो बालक के मन को छू जाए,

माता के आँसू पोंछे।

जो वीरों का उत्साह बढ़ाए,

धर्म वतन की जो सोचे॥

कविता वही कविता वही॥

कविता में हो करुणा की गाथा,

आशा का संदेश।

जहाँ शब्द हों पूजा जैसे,

और भाव हों विशेष॥

कविता वही कविता वही॥

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