कडुवा सच

जो अपने हैं अपनों से

मिलने से कतराते हैं,

पर ग़ैरों में जो अपने हैं,

ग़ैरों से मिलने आते हैं ।

अपने तो अपने होते हैं,

पर देर से समझ में आते हैं,

चिड़िया चुग जाये खेती को,

तो सिर धुनकर पछताते हैं ।

सूर्य अस्त हो जाता है,

अगली सुबह ही लौटकर आता है,

पर मन विदीर्ण हो जाये अपनों का,

बमुश्किल वापस वे आते हैं ।

नीम के पत्ते कडुवे होते हैं,

पर औषधि का काम वे करते हैं,

कडुवा ही उन्हें चबाना पड़ता है,

तभी स्वास्थ्य लाभ वे देते हैं ।

करैला कितना कषैला होता है,

पर मधुमेह को मार भगाता है,

जैसे ही खटास हटायी जाती है,

स्वादिष्ट वही खूब हो जाता है ।

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