ईश्वर मानव संवाद

हे प्रभु !

मेरे पाप हरो, मेरे विघ्न हरो

मेरे जीवन का कल्याण करें,

तुम पाप हर्ता ,

विघ्न हर्ता कहलाते हो

अपने वचनों को याद करें ।

हे मानव !

तू पाप करे, दुष्कर्म करे ,

पर अपेक्षा करे मैं तेरे पाप हरूँ,

यह न्याय कैसा

जरा तू ही बता

क्यों तेरा उद्धार करें ?

तू अपने कर्मों का भागी है

जो बोया है वही काटेगा,

लाख नहाये तू गंगा में

पर यदि निर्मल मन नहीं है तेरा

पापनाशिनी माँ गंगा भी

कैसे तेरा उद्धार करे?

अपने पापों की गठरी

तू ही उठा,

तू ही अपने कर्मों का उत्तरदायी है,

मत कर आस तू मुझ पर,

विधि का विधान तो

यही न्याय करे ।

हे प्रभु !

अहिल्या भी पाप की भागी थी

वाल्मीकि भी तो एक डाकू थे,

गज गजामिल के प्राण बचाने

धाये तुम नंगे पैरों पर,

दया करें, मेरे जीवन का उद्धार करे ।

हे मानव !

उन पवित्र आत्माओं जैसे

बनकर तू भी तो दिखा ,

पाप कर्मों से तू विरत रहे,

श्रृद्धा पूर्ण आस्था हो तेरे मन में

क्यों न ईश्वर तेरा कल्याण करे ।

जिसका उद्धरण दिया है तूने

सबने “मम् शरणम् गच्छ”

का मार्ग अपनाया था,

हो जाये पूर्ण समर्पित

जिस दिन तू मुझ पर

निश्चित ही तेरा कल्याण करें ।

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