हे मेरी प्यारी माँ

हे मेरी प्यारी माँ !

तू तो कहाँ चली

याद तेरी जब आती हैं

नयनों में आंसू मेरे आते हैं ।

जब भी घर मैं जाता था

तू दौड़ कर गले लगाती थी

कितना सुंदर लगता था

सब सपने जैसे अब लगते हैं ।

भाई बंधु सब बिखर गये,

कुछ इधर गये कुछ उधर गये,

घर बार मेरा सब छूट गया

अपने पराये अब लगते हैं ।

तेरे बिन वह घर सूना सूना लगता है,

गाँव की गलियाँ सब नीरस लगती हैं,

मधुर यादें ही शेष हैं केवल मन में,

अब सब बेगाने से लगते हैं ।

समय चक्र का पहिया तो

निरंतर चलता रहता है,

बचपन की यादों में ही तो अब जीना है

हर पल याद तेरी हम करते हैं ।

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