हे मेरे सुंदर वन,नीरव निर्जन वन,
मोह रहा है मनहे मेरे सुंदर वन ॥
चहके पंछी गगन में,भ्रमर गाए मधुबन में,
मेंढक की मीठी तान,सर्पों की छुपी पहचान
सब मिल रचते संगीत वन ॥
तेरे हृदय में अनगिन प्राणी,
पाते सुख की शरण कहानी,
मुझको भी देता शांति अनूप,
तेरा हर रंग, हर रूप मेरे वन ॥
लकड़ी के पुल पर खड़ा मैं यहाँ,
निहार रहा तुझे अपलक जहाँ,
मन करता बैठूँ सदा यहीं,
भूलूँ घर-द्वार सब यहीं मेरे वन ॥
हरा भरा रह तू सदा,
मोहित करे हर आगंतुक को,
सुख दे थके मन को
हे मेरे सुंदर वन ॥
हे मेरे सुंदर वन,नीरव निर्जन वन,
मोह रहा है मनहे मेरे सुंदर वन ॥