तू मित्र मेरा
मेरा हृदय मीत
तू कहाँ चला ।
तू छोड़ चला
इस दुनिया को ही
न पता चला ।
तप्त हृदय
अश्रुपूर्ण नयन
किससे कहूँ ।
नश्वर जग
कोई न कालजयी
जीवन सत्य ।
मृत्यु अटल
पल का भी न पता
अन्तिम सत्य ।
स्वरचित -
तू मित्र मेरा
मेरा हृदय मीत
तू कहाँ चला ।
तू छोड़ चला
इस दुनिया को ही
न पता चला ।
तप्त हृदय
अश्रुपूर्ण नयन
किससे कहूँ ।
नश्वर जग
कोई न कालजयी
जीवन सत्य ।
मृत्यु अटल
पल का भी न पता
अन्तिम सत्य ।
स्वरचित -