एक माँ की वेदना

चुप हो जा मेरे लाल मत रो मेरे लाल

रो रो के हो गया बेहाल चुप हो जा मेरे लाल

तू तो है अभी अबोध

तुझे कुछ भी नही प्रबोध

तू हो गया अनाथ

कौन देगा तेरा साथ ?

गोद में खिलाते थे तेरे पापा तुझको

कंधे पर बिठाते थे तुझको

बुनते थे हम दोनों सुन्दर सपने

राजा बेटा तुझे बनायेंगे

खूब पढ़ाये लिखायेंगे

क्रूर नियति का था नही पता

दे गयी बीच डगर में धता

उजड़ गयी जीवन बगिया मेरी

ख़ुशियाँ सब अब हवा में उड़ी

क्या हो गया तुझे आभास

आख़िर क्यों रो रहा इतना मेरा लाल ।

चुप हो जा मेरे लाल मत रो मेरे लाल

रो रो के हो गया बेहाल चुप हो जा मेरे लाल

भविष्य तेरा अब क्या होगा

पिता का प्यार कौन देगा

किसकी ऊँगली तू पकड़ेगा

किसके साथ स्कूल तू जायेगा

कोई पुकारेगा तेरा पिता कहाँ

कहाँ से ढूँढ कर तू लायेगा

आख़िर क्या जबाब तू देगा ?

जीवन पथ आसान नही पर जीवन तो जीना पड़ता है

दे रही भरोसा मैं तुझको

पिता का प्यार मैं अब तुझको दूँगी

उठाऊँगी सब भार गृहस्थी का

पर तुझको नही रोने दूँगी

तू ही अब मेरा सहारा है मेरी आँखों का तारा है

तेरे साथ जीवन मैं जी लूँगी अनाथ नहीं होने दूँगी

तू रो रो के हुआ बेहाल अब मत रो मेरे लाल ।

चुप हो जा मेरे लाल मत रो मेरे लाल

रो रो के हो गया बेहाल चुप हो जा मेरे लाल

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