दोस्त की यादें

ऐ दोस्त !

एक मलाल है तुझसे

पर कहूँ कैसे

तू तो मेरे बीच अब नहीं रहा ..

क्यों पाले था वैमनस्यता

ज़िन्दगी अकेले जीता रहा

भूल गया वो बचपन

जो साथ साथ खेले थे

अहम् में जीता रहा

मैं बड़ा हूँ मैं हूँ स्वयंभू

तुझे बचपन का दोस्त भी न दिखा

उससे भी दग़ाबाज़ी करता रहा

एक दिन दुखद समाचार मिला

तू इस दुनिया में नहीं है

कोरोना की भेंट चढ़ गया

अहम् चिता अग्नि में ख़ाक हो गया ..

काश ! चलते चलते ही सही

एक मुलाक़ात हो जाती तुझसे

गिले शिकवे दूर हो जाते

यह बोझ तेरे साथ न जाता ।

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