दो पल गीत

कुछ पल तो जी ले क्यूँ न हम प्रिय अपने लिए

याद करें वो पल जब केवल हम दो थे ।

करते थे मीठी मीठी बातें

बुनते थे सुन्दर सुन्दर सपने

अपना भी इक नया संसार होगा

बच्चों से हँसता खिलता परिवार होगा

सब कुछ तो प्रिय पाया हमने

सुख दुख के पल साथ साथ बाँटे हमने

अब कुछ पल तो जी ले

क्यूँ न हम प्रिय अपने लिए ।

मुस्कुराते पुष्प ये सुन्दर जैसे हमसे कहते

सीखो तुम हमसे मुस्कुराना

खिले हैं हम भले कुछ पल

पर मुस्कुराते ही हमें है मुरझाना

सुख के दो पल होते हैं अनमोल

आओ बैठे कुछ पल बातें करें

अब कुछ पल तो जी ले

क्यूँ न प्रिय हम अपने लिए ।

हरे भरे इन लताओं को देखो

कोमल सुन्दर पत्तियों को परखो

मानो कहती हैं हमसे

ख़ुशियों में ही है हमें जीना

बाँटना है केवल हमें ख़ुशियाँ

कुछ पल ही सही

ख़ुशियों में हैं ये जीती

अब कुछ पल तो जी ले

क्यूँ न प्रिय हम अपने लिए ।

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