दो अंजाने एक दिन मिलते,
प्रणय सूत्र में बंधते हैं ,
आपस में अजनबी हैं दोनों
दाम्पत्य जीवन पथ पर चलते हैं ।
दो राही पर पथ एक है
साथ साथ वे चलते हैं,
एक दूसरे की भावनाओं को
हृदय में आत्मसात् वे करते हैं ।
चलते रहते, बातें करते,
वह राह सुखद हो जाता है,
एक दिन ऐसा आ जाता है
मिश्री जैसे घुल जाते हैं ।
एक दूजे पर मिटने को
दोनों आतुर रहते हैं,
गुँथ जाता है प्रेम का धागा
प्रेम की डोर में बंधते हैं ।
गार्हस्थ्य जीवन सुखद बिताते
नव सृजन वे करते हैं,
कर्म पथ पर आगे बढ़ते
सुख दुख साथ बाँटते है ।
जीवन भर वे साथ निभाते,
हृदय की धड़कन होते है,
एक पल अब उनका न कटता
इतना प्यार वे करते हैं ।
अटूट प्रेम उनका हो जाता
कैसा अजीब यह नाता है,
दो अंजाने अब ऐसे लगते
जैसे सात जन्मों के नाते हैं ।